अयोध्या मामला: मुस्लिम पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट में संयुक्त रुप से ‘मोल्डिंग ऑफ रिलीफ़’ पर अपनी वैकल्पिक मांग सीलबंद लिफाफे में पेश की।

अयोध्या मामले के मुस्लिम पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट में संयुक्त रुप से ‘मोल्डिंग ऑफ रिलीफ़’ पर अपनी वैकल्पिक मांग सीलबंद लिफाफे में पेश की।

मोल्डिंग ऑफ रिलीफ़ का मतलब होता है कोर्ट से यह कहना कि अगर हमारे पहले वाले दावे को नहीं माना जा सकता तो नए दावे पर विचार किया जाए।

कोर्ट ने अयोध्या मामले में फैसला सुरक्षित रखते समय सभी पक्षकारों को मोल्डिंग ऑफ रिलीफ़ को लेकर तीन दिन में लिखित नोट जमा करने को कहा था।

राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति ने भी मोल्डिंग ऑफ रिलीफ़ को लेकर दायर किया लिखित नोट कहा – विवादित जमीन पर मंदिर बने। मंदिर के देख रेख और संचालन के लिए ट्रस्ट का गठन किया जाए।

हिन्दू महासभा ने ‘मोल्ड़िंग ऑफ रिलीफ़’ को लेकर दायर नोट में कहा है मंदिर के रखरखाव और प्रशासन के लिए कोर्ट ‘स्किम ऑफ़ एडमिस्ट्रेशन’ बनाये। कोर्ट एक ट्रस्ट का गठन करे जो राम मंदिर के निर्माण के बाद पूरी व्यवस्था देखे।

राम लला विराजमान की ओर से मोल्डिंग ऑफ रिलीफ़ पर लिखित जवाब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया ,राम लला ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि सारा क्षेत्र राम मंदिर के लिए उसे दिया जाए, निर्मोही अखाड़ा या मुस्लिम पार्टियों को जमीन का कोई हिस्सा नहीं मिलना चाहिए |